अमित शर्मा (झाबुआ अभी तक)
झाबुआ। पिछले करीब 2 महीने से नगर पालिका ओर व्यापारियों के विवादों में रही 13 जर्जर दुकानों को शुक्रवार सुबह नगर पालिका एवं प्रशासन की संयुक्त टीम ने ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान सुबह से ही प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस बल और नगर पालिका के अमले की मौजूदगी रही। पूरी कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रही ।
गौरतलब है कि नगर पालिका ने संबंधित दुकानों को क्षतिग्रस्त और जन सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए पूर्व में 13 दुकानदारों को दुकानें खाली करने के नोटिस जारी किए थे। इसको लेकर प्रभावित व्यापारियों और नगर पालिका के बीच लंबे समय तक माँगो को लेकर विवाद चलता रहा लेकिन लिखित सहमति नहीं बनी । इस मुद्दे को लेकर सकल व्यापारी संघ ने शहर बंद का आह्वान भी किया था, जिसका व्यापक असर पूरे झाबुआ नगर में देखने को मिला था।
व्यापारी वर्ग नगर पालिका के खिलाफ हाइकोर्ट भी पहुंचे परन्तु माननीय हाईकोर्ट ने व्यपारियों की धर्मशाला की 13 दुकानें तोड़ने पर रोक की मांग इंकार करते हुए कहा कि जन सुरक्षा की दृष्टि से समझौता नहीं किया जा सकता । आदेश के बाद नगर पालिका ने जर्जर भवन को हटाने की कार्रवाई शुरू की। शुक्रवार सुबह नगर पालिका प्रशासन की टीम भारी मशीनरी के साथ मौके पर पहुंची और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में दुकानों को तोड़ने का कार्य प्रारंभ किया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए एसडीएम महेश मंडलोई , डिप्टी कलेक्टर सुनील डावर नगर पालिका सीएमओ मिलन पटेल सहित पर्याप्त पुलिस बल भी तैनात रहा। सीएमओ मिलन पटेल का कहना है कि भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए यह कार्रवाई जनहित एवं सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक थी। पीपीपी मॉडल पर नई दुकानें बनेगी ।।
अब शहरवासियों और प्रभावित व्यापारियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नगर पालिका नई दुकानों का निर्माण कब तक पूरा करती है तथा पुनः आवंटन की प्रक्रिया किस प्रकार संचालित की जाएगी ।।

