अमित शर्मा (झाबुआ अभी तक)
झाबुआ। जिले के पेटलावद थाना क्षेत्र के ग्राम कोदली में छह वर्षीय मासूम उत्कर्ष नायक की निर्मम हत्या एवं उसकी दादी पर प्राणघातक हमले के मामले में झाबुआ पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने ऐशो-आराम और महंगे शौक पूरे करने के लिए इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया था।
घटना 5 मई 2026 की है, जब ग्राम कोदली निवासी उत्कर्ष पिता शैलेन्द्र नायक एवं उसकी दादी रमीलाबाई घर की छत पर गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिले थे। परिजन दोनों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पेटलावद लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने मासूम उत्कर्ष को मृत घोषित कर दिया। प्रारंभ में घटना संदिग्ध प्रतीत होने पर थाना प्रभारी निरीक्षक निर्भयसिंह भूरिया ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कराई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बालक की मौत मानव द्वारा पहुंचाई गई चोटों से होना सामने आया, जिसके बाद पुलिस ने हत्या एवं लूट का मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की।
पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र पाटीदार के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतिपाल सिंह महोबिया, एसडीओपी अनुरक्ति साबनानी एवं थाना प्रभारी निरीक्षक निर्भयसिंह भूरिया के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी साक्ष्यों एवं मुखबिर सूचना के आधार पर दो संदिग्धों को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों में जितेन्द्र उर्फ जितु निवासी छायन थाना राणापुर एवं चिराग निवासी ग्राम कोदली शामिल हैं। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि पैसों की जरूरत और महंगे शौक पूरे करने के लालच में उन्होंने रमीलाबाई को घर में अकेला पाकर हमला किया। इसी दौरान मासूम उत्कर्ष बीच में आ गया तो आरोपियों ने फावड़े से हमला कर उसकी हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी सोने के टॉप्स, अंगूठी एवं चांदी की चेन लूटकर फरार हो गए थे।
पुलिस की तत्परता और सूझबूझ से मामले का खुलासा होने पर क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली की सराहना की जा रही है। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक निर्भयसिंह भूरिया, उप निरीक्षक गोवर्धन मकवाना, उप निरीक्षक अर्चना चौहान सहित थाना स्टाफ एवं साइबर टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक द्वारा पूरी टीम को नगद पुरस्कार देने की घोषणा भी की गई है।
झाबुआ पुलिस ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा है कि वे बच्चों एवं युवाओं की गतिविधियों, मित्र मंडली और खर्च करने की आदतों पर निगरानी रखें, ताकि गलत संगति और दिखावे की प्रवृत्ति उन्हें अपराध की राह पर न ले जाए।

