"कलेक्टर" नेहा मीना की दूरदर्शिता से झाबुआ के जनजातीय शिल्प को मिलेगी नई पहचान ।।
ट्रायफेड–प्रशासन की पहल से “नामिका” मेले ने खोले राष्ट्रीय बाजार के द्वार ।।
अमित शर्मा (झाबुआ अभीतक)
झाबुआ= जिले की जनजातीय कला, संस्कृति और शिल्प को राष्ट्रीय फलक पर स्थापित करने की दिशा में कलेक्टर नेहा मीना की सक्रिय भूमिका और दूरदर्शी सोच अब जमीन पर परिणाम देती नजर आ रही है। जिला प्रशासन एवं ट्रायफेड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जनजातीय शिल्पकार “नामिका” मेले ने शिल्पकारों को आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाने का मजबूत मंच प्रदान किया है। कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती एवं भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण ओर दीप प्रज्वलन के साथ किया गया
नीति आयोग द्वारा नामित सीपीओ श्री संदीप कुमार मिश्रा की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में कलेक्टर नेहा मीना ने स्पष्ट संदेश दिया कि झाबुआ के जनजातीय उत्पाद केवल पहचान के मोहताज नहीं, बल्कि गुणवत्ता और परंपरा के दम पर राष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बनाने में सक्षम हैं। उनकी पहल पर जिले के 50 से अधिक स्व-सहायता समूहों और दर्जनों व्यक्तिगत शिल्पकारों को सीधे विपणन से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई।
सीपीओ श्री मिश्रा ने कहा कि कलेक्टर नेहा मीना के मार्गदर्शन में यदि जिले में ट्रायफेड का स्थायी प्रोक्योरमेंट सेंटर स्थापित होता है, तो यह जनजातीय अर्थतंत्र को स्थायी मजबूती देगा।
मेले में ट्राइबल ज्वैलरी, मिट्टी के बर्तन, पारंपरिक गुड़िया, पिथोरा आर्ट जैसे उत्पादों ने यह साबित कर दिया कि झाबुआ का शिल्प किसी भी बड़े बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखता है। कलेक्टर नेहा मीना ने न केवल उत्पादों की गुणवत्ता सुधार और प्रशिक्षण पर जोर दिया, बल्कि एफएसएसएआई, ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन और आधुनिक पैकेजिंग जैसे विषयों पर भी ठोस दिशा तय की। उनके नेतृत्व में झाबुआ जिला प्रशासन जनजातीय शिल्पकारों को स्थायी आजीविका और सम्मानजनक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर काम कर रहा है।
“नामिका” मेला कलेक्टर नेहा मीना की प्रशासनिक संवेदनशीलता और विकासोन्मुखी सोच का प्रत्यक्ष उदाहरण बनकर सामने आया है।
इस कार्यक्रम के अवसर पर डिप्टी कलेक्टर सुश्री अवनधती प्रधान, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्री आर.एस. बघेल, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्रीमती सुप्रिया बिसेन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

