मोटीआई मॉडल का नवाचार==झाबुआ के कुपोषण मुक्त अभियान की मप्र और देश में की गई सराहना झाबुआ की मोटीआई मॉडल बना कुपोषण मुक्ति की मिसाल।।

JHABUA ABHITAK
अमित शर्मा ( झाबुआ अभी तक)
दौलत गोलानी ( जिला संवाददाता)
झाबुआ। मप्र शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा जिले के ग्रामीण अंचलों में बच्चों को कुपोषण से मुक्ति के लिए मोटीआई के नाम कुपोषण मुक्ति हेतु विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान को मप्र और देश में सराहना मिली है। 
उल्लेखनीय है कि मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मप्र को कुपोषण मुक्त बनाने हेतु लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में मप्र शासन की महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया के विशेष प्रयासों एवं जिलाधीश नेहा मीना के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा मोटी आई के नाम से कुपोषण मुक्त विशेष अभियान संपूर्ण जिले में चलाया गया। जिसके सार्थक परिणाम सामने आए। इस अभियान में जन-जागृति एवं विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से कुपोषण को लेकर जागरूकता लाने का कार्य किया गया। जो ग्रामीण महिलाएं किसी कारणवश मजदूरी के लिए गुजरात, राजस्थान के साथ अन्य राज्यों के शहरों मंे पलायन पर चली जाती है। वह गर्भवती होने के दौरान अपने स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रख पाने से पैदा होने वाला शिशु कुपोषण का शिकार हो जाता है। बच्चें की देखरेख का पूरा जिम्मा मोटी आई द्वारा लिया जाता है और बच्चें की समुचित रखरखाव, खान-पान की व्यवस्था की जाती है। जिससे बच्चें जल्द ही स्वस्थ होकर सामान्य बच्चों की तरह अपना जीवन यापन करने के सक्षम साबित होते है। इसके साथ ही जो महिलाएं अशिक्षित एवं जागरूकता के अभाव में गर्भवती अवस्था में बच्चें का ध्यान नहीं रख पाती है, जिनके कारण भी बच्चा कमजोर पैदा होने से उसका ध्यान मोटी आई द्वारा रखने से बच्चों के जीवन में निरंतर बदलाव आ रहा है।
मप्र और देशभर में मिली सराहना 
मप्र शासन की केबिनेट मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया एवं कलेक्टर नेहा मीना के विशेष प्रयासों से मोटी आई कुपोषण मुक्त अभियान को अपार सफलता मिलने के बाद मप्र और देशभर में भी इसकी सराहना की गई है। मप्र और झाबुआ जिले में कुपोषण से मुक्ति का यह अभियान सत्त जारी रखा गया है। जिसके सकारात्मक परिणाम भी लगातार सामने आ रहे है और झाबुआ जिला कुपोषण मुक्ति की ओर से तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसमें विशेष सहयोग महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला अधिकारी आरएस बघेल सहित समस्त विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों का भी रहा है।


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