हनुमानजी के पास असीम बल और शक्ति है, इसलिए उन्हें गोस्वामी तुलसीदासजी ने हनुमान चालीसा पाठ में अतुलित बलधामा कहा है -ः श्री हरिप्रकाशदास स्वामीश्री । कष्टभंजनदेव की पूजन, आरती कर लगाया गया फलों का भोग ।। प्रथम दिन कथा श्रवण हेतु जिले एवं अन्य स्थानों से हजारों भक्त पधारे

JHABUA ABHITAK
अमित शर्मा ( झाबुआ अभी तक)
दौलत गोलानी (जिला सवाददाता)

झाबुआ। श्री संकट मोचन सेवा समिति हनुमान टेकरी एवं श्री कष्टभंजनदेव भक्त मंडल द्वारा शहर के लक्ष्मीनगर स्थित अंबा रिसोर्ट पर तीन दिवसीय श्री हनुमान चरित्र कथा के प्रथम दिन रात 8 बजे से कथा स्थल पर मुख्य मंच पर श्री कष्टभंजनदेव की सुंदर तस्वीर विराजमान कर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जलवन किया गया। साथ ही श्री कष्टभंजनदेव को 56 प्रकार के फलों का भोग लगाया गया। बाद कथा के मुख्य यजमान समाजसेवी श्रीमती मंजुला गजानंद पुरोहित, सेवानिवृत्त सब इंस्पेक्टर अशोक सिंगार एवं युवा भाजपा नेता गौरव पाठक द्वारा श्री कष्टभंजनदेव की आरती की गई। तत्पश्चात् व्यासपीठ एवं श्रीरामचरित मानस की आरती लाभार्थी यजमानों से युवा आचार्य पं. तुषार त्रिपाठी ने संपन्न करवाई। 
इस बीच मंच पर श्री सालंगपुर धाम से पधारे श्री नीलकंठ भगत एवं उनकी संगीत टीम द्वारा सामूहिक श्री हनुमान चालीसा पाठ एवं ‘मेरी झोपड़ी के सारे भाग आज खुले जाएंगे ... राम आएंगे’ सुंदर भजन प्रस्तुत किया गया। कथा स्थल पर श्री सालंगपुर धाम के सुप्रसिद्ध संत, वक्ता एवं शास्त्री श्री हरिप्रकाशदास स्वामी, श्री किर्तन स्वामी, श्री तीर्थ स्वरूप स्वामी, सरजू भगत, विहान भगत आदि के प्रवेश करने पर सभी भक्तजनों ने खड़े होकर भगवान श्रीराम, श्री स्वामीनारायण भगवान एवं श्री कष्टभंजनदेव के सामूहिक जयघोष लगाकर आत्मीय स्वागत किया। स्वामीजी एवं अन्य संतों पर पुष्पवर्षा के साथ चमकीली पन्नीयों की बौछार की गई। इस बीच श्री कष्टभंजनदेव की सुंदर धुन के बीच श्री हरिप्रकाश स्वामीजी ने श्री कष्टभंजनदेव का आर्शीवाद लेते हुए व्यास पीठ पर विराजमान हुए। स्वामीश्री का पुष्पमालाओं से स्वागत मुख्य यजमान समाजसेवी श्रीमती मंजुला गजानंद पुरोहित, सेवानिवृत्त सब इंस्पेक्टर अशोक सिंगार एवं युवा भाजपा नेता गौरव पाठक द्वारा पुष्पमालाआंे से किया गया। कथा स्थल के बाहर मरी माता मंदिर चौराहे पर तीन दिवसीय श्री हनुमान चरित्र कथा का भव्य प्रवेश द्वार लगाया जाने के साथ कथा स्थल के बाहर सुंदर रांगोली का निर्माण भी किया गया है। स्वामीजी एवं संतों के प्रवेश मार्ग पर फूलों से सुंदर सज्जा की गई है। सुंदर एवं भव्य मंच निर्माण के साथ सुंदर बैठक व्यवस्था और बारिश के चलते भक्तों की सुविधा के दृष्टिगत वाटर प्रूफ भव्य डोम भी लगाया गया है।
हनुमान भगवान बल, बुद्धि, विद्या, ज्ञान और गुणों के सागर है
व्यासपीठ पर विराजमान होते ही श्री हरिप्रकाशदास स्वामी ने उपस्थित सभीजनों ने जयश्रीराम, जय श्री स्वामीनारायण एवं जय श्री कष्टभंजनदेव के जयघोष लगाते हुए सुंदर संगीतमय भजन प्रस्तुत किया। बाद कथा के प्रथम दिन प्रवचन देते हुए श्री हरिप्रकाशदास स्वामी ने उपस्थित भक्तों से कहा कि तीन दिनों तक हम श्री हनुमान भगवान के जीवन चरित्र के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे। आपने बताया कि पूरी रामायण में दो पात्र महत्वपूर्ण रहे। एक भगवान श्रीराम एवं दूसरा रावण और तीसरे पात्र के रूप में मुख्य भूमिका श्री हनुमानजी महाराज की रहीं। जिन्होंने भगवान श्रीराम को युद्ध जीताने में सबसे बहुत महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। श्री हनुमान भगवान इतने बलशाली और शक्तिशाली देव है कि उनकी गाथा तीनों लोक में गायी जाती है। आप जगत पिता भगवान भोलेनाथ के अवतार होकर बल, बुद्धि, विद्या, ज्ञान और गुणों के सागर है। आपके व्यक्तित्व और चरित्र का पूरी तरह बखान करना असंभव है। रामायण में बजरंगबली ने भगवान श्रीराम का संदेश समुद्र लांघकर रावण की लंका पहुंचकर सीता माता तक बखूबी पहुंचाया। जब रावण को यह पता चला, तो रावण ने सैनिक भेजकर हनुमानजी को बंदी बना लिया, बदले में हनुमानजी ने अपनी पूंछ से पूरी लंका को जला दिया। जब हनुमानजी की पूंछ में इतनी ताकत है कि पूरी सोने की लंका जला दी, तो स्वयं हनुमान में कितना बल, तेजस और शक्ति होगी, इसकी कल्पना नहीं की जा सकती है।
अतुलित बलधामा की उपाधि दी गई है
जब रामायण में भगवान श्री लक्ष्मण मेघनाथ के तीर से घायल हुए, तो हनुमानजी महराज भगवान श्रीराम के कहने पर जड़ी-बूटी के पूरे पहाड़ को उठाकर ले आए और अपने प्रभु के समक्ष रख दिया। हनुमानजी में बल और शक्ति असीमित मात्रा में है, इसलिए श्री हनुमान चालीसा पाठ में गोस्वामी तुलसीदासजी ने उन्हें अतुलित बलधामा अर्थात बल और शक्ति के अपार स्त्रोत की संज्ञा दी है। कथा वाचक हरिप्रकाशदास स्वामी ने बताया कि हनुमान भगवान के पास हर समस्या का समाधान है, क्योकि वह संकटमोचन और कष्टभंजन है। आपने बताया कि जीवन में मुश्किले, संघर्ष और चुनौतियां तो आती रहती है, लेकिन सफल वहीं होता है, जो दुखों में भी अपने निर्णय के साथ मेहनत और लगनता पर विश्वास रखकर उस पर पूर्णतः अडिग रहता है। मनुष्य जीवन में भगवान श्रीराम एवं श्रीकृष्ण को भी कई मुश्किले और परेशानी आई, लेकिन उन्होंने हर मुश्किलों और समस्याओं को अपने विवेक और विनयता के बल पर हल कर पूरे संसार के लिए प्रेरणा का संदेश दिया। 
जीवन में हमेशा व्यस्त और मस्त रहना जरूरी
स्वामीजी ने आगे बताया कि हनुमानजी के जीवन में कभी समस्याएं और परेशान नहीं आई, क्योकि उनके तन-मन में अपने आराध्य भगवान श्रीराम के प्रति करूणा और अटूट श्रद्धा होने से बड़ी से बड़ी चुनौतियों को उन्होंने भगवान श्रीराम का जयकारा लगाते हुए और अपनी बल-बुद्धि के बल पर हल किया। हनुमान भगवान जिस तरह भगवान श्रीराम की भक्ति में मस्त रहते है और उनके रोम-रोम में राम बसे है, उसी तरह मनुष्य को भी जीवन में हमेशा ईश्वर की आराधना करते हुए श्रेष्ठ धर्म और श्रेष्ठ कर्म करते हुए अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। मनुष्य जन्म अनेक योनियों के बाद प्राप्त होता है, इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। 
हनुमान के नाम का सदा करे स्मरण 
कथा वाचक हरिप्रकाशदासजी ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास में श्रीरामचरित मानस पाठ, श्री हनुमान चालीसा पाठ, सुंदरकांड और बजरंग बाण पाठ में हनुमानजी के बाल्याकाल से लेकर उनकी लीलाओं, उनके अदम्य साहस, शक्ति, बल और चिरंजीवी होने का वर्णन बखूबी ढंग से किया है, इसलिए हमे भगवान श्रीराम एवं हनुमानजी के नाम का सदा स्मरण करते रहना चाहिए। चाहे सुख हो य ा दुख, भगवान को कभी नहीं भूलना चाहिए। यह झाबुआ के लिए परम् सौभाग्य है कि यहां श्री संकट मोचन हनुमान टेकरी पर विराजमान होकर झाबुआवासियों के संकटों को हरने के लिए हमेशा उपस्थित है।
हजारों की संख्या में भक्तों की रहीं उपस्थिति
प्रथम दिन कथा श्रवण के लिए पांडाल पर ना केवल झाबुआ शहर अपितु आसपास के क्षेत्रों रानापुर, मेघनगर, कल्याणपुरा, थांदला, पेटलावद, पारा, समीप दाहोद (गुजरात) से भी बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे। पूरा पांडाल भक्तों की भीड़ से खचाखच रहा। इस अवसर पर अतिथि के रूप में नगरपालिका अध्यक्ष कविता सिंगार, भाजपा खेल प्रकोष्ठ जिला संयोजक शैलेष बिट्टू सिंगार, वरिष्ठ अभिभाषक दिनेश सक्सेना एवं स्वपनिल सक्सेना, श्रीराम शरणम् सेवा समिति से सुशील शर्मा आदि उपस्थित रहे। कथा के मध्य सुंदर संगीतमय भजनों की प्रस्तुति पर आनंदित होकर भक्तों ने नृत्य भी किया और जमकर भगवान श्रीराम एवं श्री कष्टभंजनदेव के जयघोष लगाए।
आरती कर स्वल्पाहार एवं प्रसादी वितरण हुआ
प्रथम दिन कथा की विश्रांति पर मुख्य यजमान एवं लाभार्थियों के साथ सामूहिक रूप से सभी ने हाथों में थालियां लेकर श्री कष्टभंजनदेव एवं व्यास पीठ की आरती की। बाद सभी के लिए नुग्दी का प्रसाद के साथ स्वल्पाहार भी रखा गया। प्रसादी वितरण की व्यवस्था श्री संकट मोचन सेवा समिति की मातृ शक्तियों ने संभाली। वहीं कथा स्थल पर संपूर्ण व्यवस्था आयोजन समिति के युवाओं ने देखी। इस अवसर पर दाहोद (गुजरात) से पधारे श्री कष्टभंजनदेव के भक्तों ने स्वामीजी का भव्य पुष्पमाला पहनाकर आत्मीय स्वागत किया। कथा का संचालन उज्जैन से पधारे प्रेमप्रकाश स्वामीजी ने किया एवं अंत में सभी के प्रति आभार आयोजन समिति के वरिष्ठ सदस्य गजेन्द्रसिंह चंद्रावत ने माना।
फोटो 01 -ः श्री कष्टभंजनदेव की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन करते मुख्य यजमान गजानंद पुरोहित, अशोक सिंगार एवं गौरव पाठक।
फोटो 02 -ः व्यास पीठ की आरती करते यजमान एवं लाभार्थी।
फोटो 03 -ः श्री कष्टभंजन देव को फलों का लगाया गया भोग।
फोटो 04 -ः श्री हनुमान भगवन के जीवन चरित्र का वर्णन करते सुप्रसिद्ध संत कथा वाचक श्री हरिप्रकाशदास स्वामी।
फोटो 05 -ः हनुमान भगवान की लीलाओं और बल, अद्म्य साहस को स्वामीजी ने ओजस्वी शब्दों के माध्यम से प्रतिपादित किया।
फोटो 06 एवं फोटो 07 -ः कथा पांडाल भक्तों की भीड़ से खचाखच भरा रहा।
0000000000000000000000000000000000000000000000

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(सहमत !) #days=(20)

हमारी वेबसाइट आपके अनुभव को बढ़ाने के लिए कुकीज़ का उपयोग करती है. यहाँ देखे
सहमत !