जब भक्त पर ईश्वर और संत की दृष्टि पड़ती है तो उसके पूरे जीवन का कायाकल्प हो जाता है -ः कथा वाचक शास्त्री श्री हरिप्रकाशदास स्वामी ।।हनुमानजी जैसा शक्तिशाली और बलशाली इस धरती और दुनिया में दूसरा कोई नही।।

JHABUA ABHITAK
अमित शर्मा ( झाबुआ अभी तक)
दौलत गोलानी जिला सवाद दाता
झाबुआ =भगवान श्रीराम एवं श्री कष्टभंजनदेव के समधुर भजनों पर झूम उठे आयोजन समिति के सदस्य और श्रोतागण श्री कष्टभंजनदेव को चॉकलेट का लगाया गया भोग, सांसद अनिता चौहान एवं सभी यजमान और लाभार्थियों का किया आत्मीय अभिनंदन ।।
झाबुआ। श्री संकट मोचन सेवा समिति हनुमान टेकरी एवं श्री कष्टभंजनदेव भक्त मंडल द्वारा शहर के लक्ष्मीनगर स्थित अंबा रिसोर्ट में आयोजित तीन दिवसीय श्री हनुमान चरित्र कथा के दूसरे दिन कथा पांडाल पर रोशनी की आकर्षण व्यवस्था के साथ पूरे मंच एवं पांडाल को ब्लूनस और भगवा ध्वजों से सजाया गया। दूसरे दिन कथा श्रवण हेतु ना केवल झाबुआ जिले अपितु गुजरात के दाहोद, संतरामपुर एवं राजस्थान के कुशलगढ़, बांसवाड़ा से भी हजारों भक्त पहुंचे। पूरा पांडाल भक्तों की भीड़ से खचाखच रहा। कथा के दूसरे दिन श्री कष्टभंजनदेव हनुमानजी को नाना प्रकार की चॉकलेट का भोग लगाया गया। कथा का वाचन करते हुए श्री सालंगपुर धाम गुजरात के सुप्रसिद्ध संत डॉ. हरिप्रकाशदास स्वामी ने हनुमानजी की लीलाओ का वर्णन के साथ संत की महिमा का बखान किया। दूसरे दिन मप्र के दो बड़े संतों में श्री सूर्यप्रकाश स्वामी एवं श्री सत्यप्रकाश स्वामी के साथ पिपलखुंटा के महंत दयारामदासजी महाराज ने भी सानिध्य प्रदान किया। वहीं क्षेत्रीय सांसद अनिता चौहान भी कथा स्थल पर पहुुंची। 
28 अक्टूबर, मंगलवार को दूसरे दिन कथा रात 8 बजे से आरंभ हुई। सर्वप्रथम भव्य एवं आकर्षक मंच पर श्री कष्टभंजनदेव की सुंदर तस्वीर विराजमान कर आयोजन समिति ने धूप-दीप प्रज्जवलन किया। बाद श्री कष्टभंजनदेव को अनेक प्रकार की चॉकलेट का भोग लगाया गया। तीन दिवसीय कथा के मुख्य यजमान समाजसेवी श्रीमती मंजुला गजानंद पुरोहित, राजकुमार पाटीदार, गौरव पाठक आदि ने श्री कष्टभंजनदेव एवं व्यास पीठ पर विराजमान श्रीरामचरित मानस ग्रंथ और गुरूदेव की आरती करने का लाभ प्राप्त किया। कथा वाचक संत श्री हरिप्रकाशदास स्वामी ने तीन दिवसीय श्री हनुमान चरित्र कथा के मुख्य यजमान, सह-यजमान के साथ विभिन्न व्यवस्थाओ के लाभार्थी परिवारों का केसरिया दुपट्टा पहनाकर एवं श्री कष्टभंजनदेव की तस्वीर भेंटकर आत्मीय अभिनंदन किया। वहीं आयोजन समिति से राकेश झरबड़े, अरूण भावसार, दिनेश चौहान, सुशीलसिंह सिसौदिया, मुकेश नीमा, प्रदीप जैन, पुष्पेन्द्र नीमा, पं. मोहित पुरोहित पवेन्द्रंिसंह चौहान, पल्लूसिंह चौहान, युवा पियूष पटेल, सचिन जोशी, महेन्द्र पंवार, शुभम राठौर आदि ने संत श्री हरिप्रकाशदास स्वामी के साथ मप्र से पधारे दो बड़े संत श्री सूर्यप्रकाश स्वामी एवं सत्यप्रकाश स्वामीऔर पिपलखुंटा महंत दयारामदासजी महाराज का पुप्षमाला एवं दुपट्टा पहनाकर झाबुआ पधारने पर आत्मीय स्वागत किया। वहीं श्री सालंगपुर धाम से पधारे अन्य संतों में श्री किर्तन स्वामी, श्री तीर्थ स्वरूप स्वामी, श्री नीलकंठ, सरजू भगत, विहान भगत एवं संगीत मंडल के कलाकारों का भी आयोजन समिति की ओर से पुष्पमालाओं से स्वागत हुआ। बाद श्री कष्टभंजनदेव की आरती करने का लाभ यजमान एवं लाभार्थी परिवारों ने लिया। कथा के प्रवेश द्वार पर संत श्री हरिप्रकाशदास स्वामीजी की सुंदर तस्वीरे लगाए जाने के साथ कथा प्रांगण में सुंदर रांगोली एवं कथा स्थल पर पुष्पों से सुंदर सज्जा भी आकर्षण का केंद्र रहीं। 
झाबुआ भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण की धरती है
अपने उद्बोधन में श्री सूर्यप्रकाश स्वामी एवं श्री सत्यप्रकाश स्वामी ने कहा कि झाबुआ भगवान श्रीराम, हनुमानजी महाराज और भगवान श्रीकृष्ण की धरती है, क्योकि यहां पर देवालयों का संख्या अधिक होने के साथ हर दिन कोई ना कोई धार्मिक आयोजन होते रहते है और उनमें भक्तों की भारी संख्या यहां के धार्मिक माहौल और धर्म के प्रति प्रगाढ़ आस्था और श्रद्धा को प्रकट करती है। पिपलखुंटा महंत दयारामदासजी महाराज ने सभी से दोनो हाथ खड़े करवाकर भगवान श्रीराम एवं विश्वमंगल हनुमानजी महाराज के जयघोष लगाते हुए कहा कि आज झाबुआ के लिए यह परम् सौभाग्य और पुण्योदय का बल है, जब श्री सालंगपुर धाम के सुप्रसिद्ध संत श्री हरिप्रकाशदास स्वामी पधारे है एवं उनके मुखारविन्द से कलयुग के राजा और देवता श्री हनुमान भगवान, जो धरती पर साक्षात विराजमान है, उनके जीवन चरित्र का वर्णन करने और हमे सुनने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। झाबुआ जिला हमेशा धार्मिक कार्यक्रमों मंे अग्रणी रहता है। यहां की पुण्य धरा हमे असीम आनंद और सुकून की अनुभूति करवाती है।
जीवन में संत और गुरूदेव का सानिध्य होना बहुत जरूरी
सुप्रसिद्ध कथा वाचक शास्त्री हरिप्रकाशदास स्वामी ने श्री स्वामीनारायण भगवान के सुंदर भजन एवं स्तुति के साथ कथा का रसपान करवाना आरंभ किया। आपने दूसरे दिन कथा में कहा कि हम सभी को हनुमान जैसा वीर और बलशाली बनना चाहिए। हनुमान भगवान बल, बुद्धि और ज्ञान के देवता है। जीवन में हमेशा भगवान श्रीराम एवं हनुमान के नाम का स्मरण करने से हमारा जीवन पाप के बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष की ओर अग्रसर होता है। जिस तरह रामायण में श्रीराम नाम लिखे पत्थर समुद्र में भी तैर गए और रास्ता बन गया। उसी तरह भगवान के नाम स्मरण से कठिन से कठिन परिस्थितियां और संकट, कष्टों में भी हमे रास्ता मिल जाता है और हम जीवन में श्रेष्ठ और उचित मार्ग को समझकर उस पर चल पढ़ते है। भगवान के नजदीक वहीं रहता है तो अपना कर्म और धर्म दोनो समान रूप से जीवनभर करता रहता है।
संत और गुरूजनों हमे सहीं मार्ग दिखाते है
संतश्री ने आगे कहा कि संत और गुरूजन भगवान के अत्यंत नजदीक होते है, उनका सानिध्य प्राप्त कर एवं उनकी शरण में आकर हम भी जीवन के सहीं मार्ग को समझ सकते है और उस पर चलकर अपने जीवन का उद्धार कर सकते है। जिस व्यक्ति पर संत की दृष्टि पड़ती है, उसकी सृष्टि बदल जाती है, इसलिए भव सागर को पार करने के लिए संतों की कृपा और आशीर्वाद बहुत जरूरी है। श्री हनुमानजी महाराज के आराध्य भगवान श्रीराम है, वैसे ही हमे अपने आराध्य की पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ पूजा-अर्चना करना चाहिए। जिसने संतों को पूजा, उसने भगवान को पाया। श्री हरिप्रकाशदास स्वामीजी ने मप्र और झाबुआ जिले की सराहना करते हुए कहा कि यहां के लोग बहुत ही प्रेम-भाव वाले है, किसी भी चीज के लिए मना नहीं करते है और उनमें धर्म के प्रति आस्था भी अगाध है। स्वामीजी ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह की प्रसंशा करते हुए कहा कि गुजरात को यह दो लोग पूरे देश को आज चला रहे है और सनातन का गौरव पूरे देश, विश्व में परचम लहरा रहा है। साथ ही उत्तप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में कहा कि जब संत सत्ता से जुड़ते है, तो कायापलट कर देते है। 
भगवान श्रीराम एवं कष्टभंजनदेव के भजनों पर झूमे श्रोता
कथा के मध्य भगवान श्रीराम एवं श्री कष्टभंजनदेव के समधुर भजनों का श्रोताओं ने तालियां बजाकर आनंद लेने के साथ दोनो हाथ खड़े कर भगवान श्रीराम, श्री स्वामीनारायण एवं श्री कष्टभंजनदेव के सामूहिक जयघोष भी सत्त लगाए। वहीं स्वामीजी द्वारा प्रस्तुत भजन ‘मेरी झोपड़ी के भाग आज खुले जाएंगे, राम आएंगे एवं श्री कष्टभंजनदेव सत्य छे’ पर श्रोतागण इतना अधिक मंत्रमुग्ध हो गए कि उत्साहपूर्वक मंच के सामने नृत्य करने लगे। आयोजन समिति के सदस्यों के साथ समस्त मातृशक्तियों और युवाओं ने जमकर नृत्य किया। उन पर गुब्बारों और चमकीली पन्नीयों की जमकर बौछार की गई। वहीं कथा के लाईव प्रसारण हेतु मंच पर दो भव्य एलईडी भी लगाई गई। जिसमें कथा के प्रथम दिवस की मुख्य झलंकियों के साथ श्री संकट मोचन हनुमान टेकरी और श्री कष्टभंजनदेव सालंगपुर धाम का लाईव प्रसारण देखकर दर्शक काफी अभिभूत हुए।
सांसद अनिता चौहान का किया आत्मीय अभिनंदन 
आयोजन समिति के मीडिया प्रभारी दौलत गोलानी ने बताया कि कथा में पधारी सांसद अनिता चौहान का श्री संकट मोचन सेवा समिति की मातृ शक्तियों ने पुष्पगुच्छ देकर एवं श्री कष्टभंजदेव की तस्वीर भेंटकर आत्मीय अभिनंदन किया। कथा की विश्रांति पर सभी ने अपने हाथों में थालियां लेकर श्री कष्टभंजनदेव की सामूहिक आरती उतारी। कथा का सुंदर संचालन उज्जैन से पधारे श्री प्रेमप्रकाश स्वामी द्वारा किया जा रहा है। दूसरे दिन कथा की विश्रांति पर सभी भक्तों को श्री कष्टभंजनदेव को अर्पण किया चॉकलेट का प्रसाद वितरण के साथ सभी के लिए स्वादिष्ट स्वल्पाहार का आयोजन भी रखा गया। कथा के अंत में पधारे सभी संतगणों एवं श्रोताजनों का आभार श्री संकट मोचन सेवा समिति के वरिष्ठ सदस्य गजेन्द्रसिंह चंद्रावत ने किया।
फोटो 01 -ः श्री कष्टभंजनदेव को चॉकलेट का भोग लगाया गया।
फोटो 02 -ः कथा के दूसरे दिन श्री हरिप्रकाशदास स्वामीजी ने संत और गुरू की महिमा का वर्णन किया।
फोटो 03 -ः संत श्री हरिप्रकाशदास स्वामीजी ने कथा के मध्य समधुर संगीतमय भजन भी प्रस्तुत किए।
फोटो 04 -ः संत श्री सूर्यप्रकाश स्वामीजी एवं श्री सत्यप्रकाश स्वामीजी ने सनातन धर्म पर ओजस्वी व्यक्तत्व दिया।
फोटो 05 -ः आमंत्रण-पत्रिकाओं के लाभार्थी डॉ. लोकेश दवे का अभिनंदन करते संत श्री हरिप्रकाशदास स्वामी।
फोटो 06 -ः सांसद अनिता चौहान को श्री संकट मोचन सेवा समिति की मातृ शक्तियों ने श्री कष्टभंजदेव की तस्वीर भेंट की।
फोटो 07 एवं फोटो 08 -ः कथा में समधुर भजनों पर आनंदित होकर झूमते युवा भक्तजन एवं मातृ शक्तियां।
फोटो 09 -ः कथा के मध्य सभी ने दोनो हाथ खड़े कर भगवान श्रीराम, श्री स्वामीनारायण एवं श्री कष्टभंजदेव के सामूहिक जयघोष लगाए।
फोटो 09 -ः कथा पांडाल हजारों भक्तों की भीड़ से खचाखच भरा रहा।
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