कहानी बदलाव की --
टेंट हाउस से शुरू हुआ सफर, आज अम्बा पैलेस और आंबा रिसॉर्ट का संचालन ।।
अमित शर्मा (झाबुआ अभीतक)
झाबुआ। करीब 22 वर्ष पहले झाबुआ के बाजार में पेपर बांटकर आजीविका शुरू करने वाले नीरज सिंह राठौर आज उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। सीमित संसाधनों के बीच स्वरोजगार का रास्ता चुनने वाले राठौर ने शासकीय योजना के तहत मिले 2 लाख रुपए के ऋण से टेंट व्यवसाय शुरू किया। कारोबार बढ़ा तो उन्होंने अम्बा पैलेस और आंबा रिसॉर्ट का संचालन शुरू किया। वर्तमान में उनके उद्यमों से 100 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की बात सामने आई है।
छोटे काम से शुरू की उद्यमिता की राह
नीरज राठौर ने करीब 22 वर्ष पहले पेपर वितरण का काम शुरू किया था। इसी दौरान उन्होंने स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। पूंजी की कमी उनके सामने बड़ी चुनौती थी। व्यवसाय शुरू करने के लिए उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, झाबुआ से संपर्क किया। विभागीय मार्गदर्शन के बाद उन्हें स्वरोजगार योजना के तहत भारतीय स्टेट बैंक, झाबुआ से 2 लाख रुपए का ऋण टेंट हाउस व्यवसाय के लिए मिला।
ऋण से शुरू हुआ कारोबार धीरे-धीरे आगे बढ़ा। राठौर ने व्यवसाय का विस्तार किया और आज वे अम्बा पैलेस एवं आंबा रिसॉर्ट का संचालन कर रहे हैं। उनके अनुसार, शुरुआती दौर की मेहनत और व्यवसाय को लगातार आगे बढ़ाने के प्रयासों ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
बोले- छोटे स्तर से शुरू किया था काम
राठौर ने अपनी यात्रा साझा करते हुए बताया कि शुरुआत में वे झाबुआ बाजार में पेपर बांटते थे। बाद में स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया और टेंट व्यवसाय से शुरुआत की। शासकीय योजना से मिले ऋण ने व्यवसाय शुरू करने के लिए जरूरी पूंजी उपलब्ध कराई। इसके बाद उन्होंने कारोबार को धीरे-धीरे विस्तार दिया।
उन्होंने स्वरोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। राठौर के मुताबिक, ऐसी योजनाओं से सीमित आर्थिक संसाधनों वाले लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिलता है।
सेवा-संकल्प अभियान के ‘कहानी बदलाव की’ के तहत सामने आई यह कहानी छोटे स्तर से शुरू होकर व्यवसाय विस्तार तक पहुंचने और रोजगार सृजन की यात्रा को रेखांकित करती है।

