गमछे में निकले कलेक्टर: सादगी, संवेदनशीलता और जमीन से जुड़ी प्रशासनिक कार्यशैली ।।

JHABUA ABHITAK

अमित शर्मा ( झाबुआ अभीतक)
झाबुआ। भीषण गर्मी और तेज लू के दौर में झाबुआ कलेक्टर डा योगेश तुकाराम भरसट का एक बेहद सादा और जनसामान्य से जुड़ा हुआ रूप इन दिनों सामने आया हे । ग्रामीण क्षेत्रों के लगातार भ्रमण के दौरान झाबुआ कलेक्टर योगेश तुकाराम भरसट सिर पर टोपी और कंधे पर गमछा डालकर गांव-गांव पहुंच रहे हैं। उनका यह देसी अंदाज़ आम लोगों को बेहद पसंद आ रहा है।।
गमछा भारतीय ग्रामीण जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यह एक छोटा सूती कपड़ा होता है, जिसका उपयोग विशेष रूप से गर्मी और लू से बचने के लिए किया जाता है। देश के ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों में लोग वर्षों से गमछे का उपयोग धूप, पसीने और गर्म हवाओं से राहत पाने के लिए करते आ रहे हैं। खेतों में काम करने वाले किसान, मजदूर और आमजन आज भी इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा मानते हैं।
ऐसे समय में जब बड़े अधिकारी अक्सर औपचारिक और वीआईपी अंदाज़ में नजर आते हैं, वहीं झाबुआ कलेक्टर डॉ योगेश तुकाराम भर सट का गमछा और टोपी पहनकर ग्रामीण क्षेत्रों में जाना उनकी सादगी और जमीन से जुड़ी कार्यशैली को दर्शाता है। 
कलेक्टर डॉ भरसट द्वारा शुक्रवार को जिले के राणापुर में कड़ी धूप के बावजूद गमछा ओर टोपी पहने शासकीय योजनाओं की स्थिति का निरीक्षण कर रहे थे । वे ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझ रहे हैं और अधिकारियों को मौके पर ही समाधान के निर्देश दे रहे हैं।
झाबुआ जिले में कलेक्टर डा योगेश तुकाराम भर सट की यह सादगीपूर्ण और संवेदनशील कार्यशैली लोगों के बीच प्रशंसा का विषय बनी हुई है। आमजन का कहना है कि प्रशासन में ऐसे अधिकारी जनता का भरोसा मजबूत करते हैं, जो जमीन पर उतरकर लोगों के बीच काम करते हैं। राणापुर भ्रमण के दौरान एसडीएम महेश मंडलोई एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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