अमित शर्मा ( झाबुआ अभी तक)
दौलत गोलानी ( जिला संवाद दाता)
झाबुआ। श्री संकट मोचन सेवा समिति हनुमान टेकरी एवं श्री कष्टभंजनदेव भक्त मंडल द्वारा शहर के लक्ष्मीनगर स्थित अंबा रिसोर्ट पर आयोजित तीन दिवसीय श्री हनुमान चरित्र कथा के अंतिम दिवस कथा का रसपान करने झाबुआ जिले ही अपितु गुजरात और राजस्थान के अलग-अलग स्थानों से हजारों भक्त कथा पांडाल में एकत्रित हुए। जिनकी भीड़ से पूरा पांडाल खचाखच भर गया। कथा पांडाल में भक्तों की भारी भीड़ के चलते पैर रखने तक की जगह नहीं बची। कथा के तीसरे दिन श्री कष्टभंजनदेव को छप्पन भोग लगाकर कथा विश्रांति पर महाआरती की गई। आयोजन समिति की ओर से कथा वाचक शास्त्री श्री हरिप्रकाशदास स्वामी का नागरिक अभिनंदन किया गया। स्वामीजी ने सभी भक्तजनों को दर्शन लाभ भी प्रदान किया।
तीन दिवसीय श्री हनुमान चरित्र कथा के अंतिम तीसरे दिन रात 8 बजे भव्य एवं सुसज्जित मंच पर श्री कष्टभंजनदेवजी की सुंदर तस्वीर विराजमान कर छप्पन प्रकार के भोग भगवान को अर्पण किए गए। बाद आयोजन समिति ने श्री कष्टभंजदेवजी की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं धूप-दीप प्रज्जवचलन किया। इस दौरान श्री नीलकंठ भगत एवं उनकी संगीत मंडली द्वारा सामूहिक श्री चालीसा पाठ एवं हनुमान स्तुति की गई।
इसी बीच 8.30 बजे कथा स्थल पर सुप्रसिद्ध संत श्री हरिप्रकाशदास स्वामी, श्री किर्तन स्वामी, श्री तीर्थ स्वरूप स्वामी, सरजू भगत, विहान भगत आदि के आगमन पर आयोजन समिति द्वारा जोरदार आगवानी एवं स्वागत किया गया। उपस्थित समस्त श्रद्धालुओं ने अपने स्थान पर खड़े होकर भगवान श्रीराम, श्री स्वामीनारायण एवं श्री कष्टभंजनदेव के सामूहिक जयघोष लगाए। कथा वाचक हरिप्रकाशदास स्वामीजी के मंच पर आते ही सर्वप्रथम आपने श्री कष्टभंजनदेवजी को नमन किया। बाद व्यास पीठ पर विराजमान हुए। कथा के मुख्य यजमान मंजुला गजानंद पुरोहित के साथ पार्थ एवं कुशाग्र सक्सेना तथा अन्य यजमानों ने श्री कष्टभंजन देव की पूजन कर व्यास पीठ पर विराजमान श्रीरामचरितमानस ग्रंथ की भी पूजन कर गुरूदेव के चरणों में नमन किया। इसके बाद मुख्य यजमान एवं लाभार्थी परिवारों के साथ तीसरे दिन अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व सांसद गुमानसिंह डामोर, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य ओमप्रकाश शर्मा, पूर्व आईएएस अधिकारी सूरज डामोर, भारतीय स्त्री शक्ति की राष्ट्रीय सचिव किरण शर्मा, भाजपा जिला मंत्री आरती भानपूरिया, किन्नर समाज प्रमुख रानी बहन आदि ने श्री कष्टभंजनदेव एवं व्यास पीठ की आरती की। इस दौरान मप्र के खातेगांव से पधारे श्रीराम कथा वाचक अशोक पाठक के आगमन पर उन्हें मंच पर आसीन किया गया। श्री सालंगपुर धाम के संत नीलकंठ भगत द्वारा मंच पर लगी दो भव्य एलईडी पर कथा के दूसरे दिन की प्रमुख झलकियां दिखाने के साथ श्री कष्टभंजनदेव तीर्थ सालंगपुर धाम की वीडियों क्लिीपिंग दिखाई गई। जिसे देखकर उपस्थित श्रोतागणों ने आनंदित होकर श्री कष्टभंजनदेव के जमकर जयघोष लगाए। पूर्व सांसद गुमानसिंह डामोर, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य ओमप्रकाश शर्मा के साथ आयोजन समिति से वरिष्ठ राकेश झरबड़े, अरूण भावसार, गजेन्द्रसिंह चंद्रावत, दिनेश चौहान, मुकेश नीमा, पल्लूसिंह चौहान, प्रदीप जैन, पवेन्द्रसिंह चौहान, डॉ. लोकेश दवे, पियूष पटेल, तरूण बैरागी, श्यामसुंदर शर्मा, सुभाष गिधवानी, अशोक चौहान, पुष्पेन्द्र नीमा, मीडिया प्रभारी दौलत गोलानी, संतकुमारकुमार चौबे, कपित कुमावत आदि ने व्यास पीठ पर विराजमान स्वामीजी का पुष्पमाला पहनाकर अभिनंदन किया।
भगवान करूणा और मन के भाव से प्रसन्न होते है
अंतिम दिवस कथा की शुरूआत हरिप्रकाशदास स्वामीजी ने स्वामीनारायण भगवान की स्तुति एवं भगवान श्रीराम के जयकारों के साथ की। श्री हरिप्रकाशदास स्वामी ने कहा कि भगवान को धन, दौलत, मोह माया से कोई लेना-देना नहीं होता है, वह तो बस अपने भक्त की आस्था, श्रद्धा, भावना और मन तथा अंतकरण के शुद्ध-पवित्र भाव से प्रसन्न होते है। श्री हनुमानजी महाराज भी ऐसे देवता है, जो अल्प पूजा एवं भक्ति से जल्द ही प्रसन्न हो जाते है और भक्त के सारे कष्ट और परेशानियों को हर लेते है। वह भगवान श्रीराम की भक्ति में रमते है और हमे उनकी भक्ति में रमकर अपने जीवन को धन्य बनाना है। भगवान के सामने ऊंच, नींच, जात-पात का भेद नहीं होता है और ना ही रंग तथा अमीरी-गरीबी का अंतर होता है, वह तो बस थोड़े में ही प्रसन्न होकर मनवांछित फल देते है।
कर्म मनुष्य को श्रेष्ठ और बलवान बनाते है
स्वामीजी ने बताया कि कर्म की बड़ी महिमा है। हमारे पिछले जन्मों के कर्म के आधार पर ही हमे वर्तमान में भोगना पड़ता है। यदि कर्म अच्छे नहीं है, तो चाहे बच्चा धनवान, राजा के यहां पैदा क्यो नाहो जाए, लेकिन उसमें दोष स्वतः ही झलक जाएंगे, इसलिए जीवन में कर्म और धर्म श्रेष्ठ करे। आज मनुष्य कुत्ता पालना और उसके प्रति वफादारी का परिचय देता है, लेकिन इंसान से घृणा, ईष्या, वैर-भाव आदि रखता है। पैसों और संपत्ति के लिए परिवार में विवाद हो जाते है। घर में कलश और संताप उत्पन्न हो जाता है। सबसे बड़ा सुख स्वस्थ तन और स्वस्थ मन है। वहीं सबसे बड़ा धन परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और संतोष है। जिसे हम अपने भीतर ही खोजकर अर्जित कर सकते है, इसके लिए कहीं जाने की आवश्यकता नहीं है। जिसे जितना मिला है और जितना उसके पास है, उतने में ही खुश रहना और आनंद के साथ जीवन व्यतीत करना सफलता की सबसे बड़ी पूंजी है।
हनुमानजी की सेवा कभी निष्फल नहीं जाती
श्री हरिप्रकाशदास स्वामी ने कहा कि हनुमान भगवान सर्व गुण संपन्न देवता है, उनकी भक्त द्वारा की गई सेवा कभी निष्फल नहीं जाती है। महावीर अजर और अमर है। उनकी भक्ति मंें रमकर हम अपने जीवन को धन्य एवं श्रेष्ठ बना सकते है। आज सनातन धर्म के लोग गौत्र, जात, पात में बंटेहुए है। पूरे विश्व में भारत ही हिन्दूओं के लिए सेफ कंट्री है, लेकिन उस देश में भी हिन्दू गौत्र और जात-पात में बंटकर ऊंच-नींच का भेदभाव रखता है। एक-दूसरे से कटता है, यह अत्यंत ही बड़ी विडंबना है। हमे अपने सनातनी होने पर गर्व होना चाहिए। सनातन धर्म अति प्राचीन धर्म है और इस धर्म को जीवंत रखने में देशभर के साधु, संतों और गुरूओं का विशेष योगदान रहा है। इस दौरान स्वामीजी ने ‘हनुमान की शरण में सिर झूकाकर तो देखो, दुनिया से क्या सहारा लेना, हनुमान तेरा सहारा ही काफी है, वीर हनुमान अति बलवाना, राम-राम जपियों रे हनुमंत बसियों रे ...’ जैसे समधुर संगीतमय भक्तजनों पर भक्तजन अत्यंत ही आनंदित हुए और जमकर तालियां बजाई। कथा की विश्रांति पर श्री हरिप्रकाशदास स्वामी ने कथा के आयोजक श्री संकट मोचन सेवा समिति एवं श्री कष्टभंजनदेव भक्त मंडल के साथ कथा के समस्त यजमानों और लाभार्थी परिवारों का आभार मानते हुए कहा कि इतना बड़ा आयोजन करने से निश्चित ही इसका लाभ आप सभी को मिलेगा। साथ ही जो श्रोतागण इस कथा के साक्षी बने है, उनके हमेशा स्वस्थ और प्रसन्न रहने के लिए लिए श्री हरिप्रकाशदास स्वामीजी ने श्री कष्टभंजनदेव से प्रार्थना की।
श्री बड़केश्वर महादेव ग्रुप ने की महाआरती
कथा की विश्रांति पर लाभार्थी श्री बड़केश्वर महादेव ग्रुप के साथ पांडाल में उपस्थित हजारों भक्तों ने हाथों में दीपकों से सजी थालियां और मोमबत्तीयां लेकर श्री कष्टभंजनदेव की महाआरती की। जिसके बाद पूरा पांडाल भगवान के जयकारों से गूंज उठा। कथा के अंतिम दिन आयोजन समिति की ओर से श्री हरिप्रकाशदास स्वामी एवं अन्य सभी संतगणों का नागरिक अभिनंदन किया गया। महाआरती बाद भक्तों को छप्पन भोग का प्रसाद वितरण करने के साथ स्वल्पाहार की भी व्यवस्था रखी गई।
श्री कष्टभंजनदेव एवं गुरूदेव का सुंदर चित्र भेंट किया
स्वामीजी ने कथा की विश्रांति पर उपस्थित भक्तों को आशीर्वाद भी प्रदान किया। साथ ही भक्तजनों द्वारा स्वामीश्री का पुष्पमालाओं एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा शाल-श्रीफल से अभिनंदन करने के साथ एक भक्त अजय बैरागी (पेंटर) निवासी गोपाल कॉलोनी द्वारा स्वामीजी को श्री कष्टभंजन एवं गुरूदेव का स्वयं द्वारा बनाया गया सुंदर चित्र भेंट किया, जिसकी स्वामीजी ने सराहना की। तीन दिवसीय श्री हनुमान चरित्र कथा को भव्य, सफल और सा-आनंद संपन्न बनाने हेतु आयोजन समिति के युवा सदस्य सचिन जोशी ने सभी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। स्वामीजी एवं अन्य संतागणों का 30 अक्टूबर, गुरूवार सुबह 7.30 बजे झाबुआ से गुजरात के लिए प्रस्थान हुआ। आयोजन समिति ने स्वामीजी एवं सभी संतगणों के प्रति ह्रदय की गहराईयों से कृतज्ञता व्यक्त की।

