झाबुआ में श्री हनुमंत चरित्र कथा के रूप में हनुमानजी महाराज साक्षात रूप से विराजमान होने जा रहे है -ः श्री नीलकंठ महाराज। श्री संकट मोचन सेवा समिति हनुमान टेकरी एवं श्री कष्टभंजनदेव भक्त मंडल द्वारा आमंत्रण-पत्रिकाओं का हुआ गरिमामय विमोचन ।।

JHABUA ABHITAK
अमित शर्मा ( झाबुआ अभी तक)

झाबुआ से दौलत गोलानी की रिपोर्ट
झाबुआ। शहर के श्री संकट मोचन हनुमान टेकरी पर श्री संकट मोचन सेवा समिति हनुमान टेकरी एवं श्री कष्टभंजनदेव भक्त मंडल द्वारा 12 अक्टूबर, रविवार रात तीन दिवसीय जिला स्तरीय श्री हनुमान चरित्र कथा की आमंत्रण-पत्रिकाओं का गरिमामय विमोचन कार्यक्रम रखा गया। प्रारंभ में श्री संकट मोचन हनुमानजी महाराज की सामूहिक आरती कर श्री हनुमान चालीसा पाठ किया गया। बाद मंदिर परिसर में कथा की आमंत्रण-पत्रिकाओं का विमोचन समारोह आयोजित हुआ।
जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में श्री सालंगपुर धाम से पधारे संत श्री नीलकंठ महाराज के साथ वरिष्ठ अभिभाषक दिनेश सक्सेना, अंकुरम इंटरनेशनल स्कूल संचालक डॉ. लोकेश दवे एवं नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती कविता सिंगार मंचासीन रहीं। अतिथियो का पुष्पमाला एवं पुष्पगुच्छ भेंटकर अभिनंदन श्री संकट मोचन सेवा समिति अध्यक्ष राकेश झरबड़े, पूर्व अध्यक्ष अरूण भावसार, वरिष्ठ सदस्य मुकेश नीमा, सुशीलसिंह सिसौदिया, श्यामसुंदर शर्मा, पवेन्द्रसिंह चौहान, श्री कष्टभंजनदेव भक्त मंडल से पियूष पटेल, शुभम राठौर, मातृ शक्ति से नीता भावसार एवं शीतल चौहान आदि ने किया। श्री संकट मोचन सेवा समिति के वरिष्ठ सदस्य गजेन्द्रसिंह चंद्रावत ने तीन दिवसीय श्री हनुमान चरित्र कथा आयोजन की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए सभी श्रीराम एवं हनुमान भक्तों से कथा में अधिकाधिक संख्या मंे पधारकर लाभ लेने हेतु आव्हान किया। श्री कष्टभंजनदेव भक्त मंडल से युवा सदस्य सचिन जोशी ने कहा कि झाबुआ मंे प्रथम बार एक अद्भुत, अकल्पनीय एवं अविस्मणीय श्री हनुमान चरित्र कथा होने जा रहंी है, जिसके हम सभी सहभागी बनेंगे। नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि शैलेष बिट्टू सिंगार ने श्री कष्टभंजनदेव तीर्थ के दर्शन के अनुभव सुनाते हुए कहा कि उन्हें वहां साक्षात हनुमानजी के दर्शन हुए। श्री कष्टभंजन तीर्थ पर भक्तों के लिए दर्शन, आवास, भोजन आदि की समुचित व्यवस्था है। यह तीर्थ स्थल लाखों भक्तों की आस्था एवं श्रद्धा का केंद्र है।
हनुमान टेकरी के सौंदर्य में निरंतर हुई वृद्धि
वरिष्ठ अभिभाषक दिनेश सक्सेना ने श्री हनुमान टेकरी के इतिहास के बारे में बताया कि सन् 1957 में यहां पर एक छोटी सी टेकरी थी। यहां प्रतिवर्ष मेले और दंगल का आयोजन होता था, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया। मंदिर के प्रति भक्तों की आस्था बढ़ी एवं मंदिर समिति का गठन हुआ, तो उसके बाद मंदिर के सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों में लगातार वृद्धि होने के साथ आज हनुमान टेकरी पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्तजन दर्शन के लिए आते है। अंकुरम इंटरनेशनल स्कूल के संचालक डॉ. लोकेश दवे ने बताया कि झाबुआ को यह परम् सौभाग्य प्राप्त हो रहा है, जब श्री कष्टभंजनदेव तीर्थ के प्रबंधक एवं देश-विदेशों में कथा के माध्यम से लाखों लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने वाले सुप्रसिद्ध संत डॉ. हरिप्रकाश स्वामीजी के मुखारविन्द से श्री हनुमानजी के चरित्र का वर्णन होने जा रहा है। आप हम सभी उसके साक्षी बनेेंगे।
हनुमानजी के पास हर समस्या का है समाधान
मुख्य अतिथि श्री कष्टभंजनदेव सालंगपुर धाम से पधारे सुप्रसिद्ध संत श्री नीलकंठ भगत ने सभी ने भगवान श्री स्वामी नारायण, श्रीराम एवं श्री कष्टभंजन देव के जयघोष लगवाते हुए कहा कि श्री हनुमानजी महाराज ऐसे देवता है, जिनके पास हर समस्या का समाधान है। हनुमानजी बल, बुद्धि, ऊर्जा, शक्ति के स्त्रोत होकर ज्ञान और गुणों से परिपूर्ण है। वे संकट मोचन और कष्टभंजन है। हनुमान के जीवन चरित्र से हमे जीवन जीने की सहीं दिशा और मार्गदर्शन प्राप्त होता है। उनकी लीलाओ को जानना हमारे के लिए काफी रोचक है। इस अवसर पर श्री बड़केश्वर महादेव ग्रुप के सदस्यों ने तीन दिवसीय हनुमान चरित्र कथा के दौरान महाआरती की सहयोग राशि में ओर अभिवृद्धि कर तन-मन से उक्त आयोजन में पूर्ण सहयोग करने हेतु आश्वस्त किया।
आमंत्रण-पत्रिकाओं का हुआ विमोचन
समारोह के दौरान तीन दिवसीय श्री हनुमान चरित्र कथा की आमंत्रण पत्रिकाओं को अतिथियों ने श्री संकट मोचन एवं श्री कष्टभंजनदेव के जयकारों के साथ गरिमामय रूप से विमोचन किया। बाद अतिथियों सहित उपस्थित सभीजनों को आमंत्रण-पत्रिकाओं का वितरण भी किया गया। इस दौरान पारा एवं दाहोद (गुजरात) से पधारे श्री कष्टभंजन देव के भक्तों ने श्री नीलकंठ महाराज का आत्मीय अभिनंदन किया। समारोह का सफल संचालन श्री संकट मोचन सेवा समिति हनुमान टेकरी के दिनेश चौहान ने किया एवं आभार समिति के पल्लूसिंह चौहान ने माना। समारोह में आयोजन समिति के पदाधिकारी-सदस्यों के साथ गणमान्यजन आदि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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