झाबुआ-अलीराजपुर के भील समाज की परमार्थ परंपरा 'हलमा' को मिला राष्ट्रीय सम्मान ।। यूनैस्को की सहभागिता में शिवगंगा को मिला “वॉटर डाइजेस्ट अवार्ड 2024–25 ।।

JHABUA ABHITAK
अमित शर्मा (झाबुआ अभीतक)
झाबुआं= अचल में जनभागीदारी से अक्षय विकास के लिए गत 25 वर्षों से कार्यरत शिवगंगा समग्र ग्रामविकास परिषद् को “वॉटर डाइजेस्ट अवार्ड 2024–25” से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार “पानी पंचायत चैंपियंस” श्रेणी में UNESCO की सहभागिता में प्रदान किया गया।
यह सम्मान केवल एक संस्था को नहीं, बल्कि झाबुआ और अलीराजपुर के भील जनजातीय समाज की उस सामूहिक चेतना और परमार्थ की परंपरा को दिया गया है, जिसने जल संकट को चुनौती नहीं, एक अवसर के रूप में स्वीकार कर हलमा जैसे जनआंदोलन के माध्यम से गाँव-गाँव में जल संरचनाएँ खड़ी कीं।

हलमा भील समाज के एक प्राचीन परमार्थ की परंपरा है। जब कोई व्यक्ति संकट में होता है और वह अपने पूरे प्रयासों के बावजूद भी उस संकट से नहीं उबर पाता तो वह हलमा बुलाता है और गाँव के सभी लोग मिलकर निस्वार्थ भाव से कार्य कर उस व्यक्ति को इस संकट से उबार लेते हैं। आज यही परंपरा गाँव-गाँव में जल संरक्षण और पर्यावरण पुनर्रचना के रूप में प्रकट हो रही है।

शिवगंगा के प्रयासों से अब तक झाबुआ के ग्रामीणों ने हलमा के माध्यम से—
130 से अधिक तालाब,
2.5 लाख से अधिक कंटूर ट्रेंचें का निर्माण किया है, जिससे हर वर्ष 1000 करोड़ लीटर से अधिक जल संरक्षण क्षमता विकसित हुई है।

इन प्रयासों से न केवल जल संकट कम हुआ, बल्कि खेती, आजीविका और ग्राम-आत्मनिर्भरता की दिशा में एक स्थायी सामाजिक परिवर्तन देखने को मिला है।
यह सम्मान देश और दुनिया के लिए एक संदेश है कि जब समाज स्वयं खड़ा होता है, परमार्थ के लिए जुटता है, तो वह अपने भाग्य को भी बदल सकता है।

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