धर्म क्रिया से ही मानसिक शांति प्राप्त हो सकती है -मुनि श्री ऋषभचन्द्र विजयजी मुनिद्वय के मंगल प्रवेश पर शहर में निकाली गई शोभायात्रा

JHABUA ABHITAK


अमित शर्मा
झाबुआ। मनुष्य कितने भी भौतिक साधनों से संपन्न हो जाए, उसे कोई ना कोई दुख अवश्य होता है, चाहे वह शारीरिक हो, मानसिक हो या भौतिक। उसके बाद भी प्रत्येक व्यक्ति सुख की कामना करता है और दुख से सदैव दूर रहने के प्रयास करता है, परन्तु वास्तव में दुःख ही मनुष्य का सच्चा साथी है, क्योकि जब व्यक्ति दुःखी होता है, तब ही वह अपने ईष्ट देव को याद करता है।
उक्त उद्गार भावी आचार्य, श्री मोहनखेड़ा तीर्थ के विकास प्रेरक, ज्योतिष सम्राट, सरल स्वभावी, पपू मुनिराज श्री ऋषभचन्द्र विजयजी मसा ने विश्व पूज्य दादा गुरूदेव श्रीमद् विजय राजेन्द्र सूरीश्वर द्वारा प्रतिष्ठित स्थानीय श्री ऋषभदेव बावन जिनालय की धर्मशाला में सोमवार को दोपहर व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि आग के युग में कोई भी व्यक्ति भावों से भगवान को याद नहीं करता है। यदि भाव से भगवान की पूजा की जाए, तो भगवान सदैव भक्तों के साथ रहते है। सुख और दुख की व्याख्या करते हुए आपने कहा कि यह सब कर्मों के अधीन है, अतः प्रत्येक व्यक्ति को सदैव अच्छे कर्म करना चाहिए, धर्म क्रिया में लीन रहना चाहिए तथा बुराई एवं विवादों से दूर रहना चाहिए।
झाबुआ श्री संघ की प्रसंशा की
मुनिश्री ने बताया कि संत हमेशा समाज का मार्गदर्शक रहता है, सरंक्षक रहता है तथा समाज के हित में वह अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर देता है। झाबुआ श्री संघ की प्रसंशा करते हुए आपने कहा कि आज से 12 वर्ष पूर्वं मैने यहां चार्तुमास किया था, तब भी मुझे जैन तथा अन्य सभी संप्रदायों का पूरा सहयोग एवं समर्पण तथा गुरू भक्ति देखने को मिली थी, जो आज भी यहां पर यथावत है।

साधु भक्तों को सही रास्ता बताते है
मुनिश्री पियूषचन्द्र विजयजी मसा ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि प्रत्येक व्यक्ति गुरू से अपने हित में कई काम करवाना चाहता है, परन्तु जब धर्म क्रिया करने की बात आती है, तब वह इसका पालन नहीं करता है। आपने उपस्थित श्रावकों से अनुरोध किया कि उन्हें गुरू की क्रियाओं का, उनके जप-तप एवं ध्यान अवस्था का ध्यान रखकर ही उनसे चर्चा करना चाहिए। साधु हमेशा अपने सभी भक्तों को सही रास्ता बताते है।
साधु संत हमेशा संयम जीवन व्यतीत करते है
प्रभु श्री महावीर स्वामीजी की सभा का वृतांत बताते हुए आपने कहा कि प्रत्येक श्रावक को साधु के समक्ष विनय भाव से उपस्थित होकर उनकी आज्ञा लेकर ही उनसे कोई प्रश्न पूछना चाहिए, या चर्चा करना चाहिए। आपने बताया कि आज के समय में विशेषकर श्रावक लोग घर-सांसारिक समस्याओं के बारे में साधु-महात्माओं से निराकरण हेतु विनती करते है, जबकि जैन साधु-संत सदैव सांसारिक एवं भौतिक समस्याओं से दूर रहकर अपना संयम जीवन व्यतीत करते है। ऐसी स्थिति में श्रावकगणां को साधु-संतों से धर्मोचित एवं व्यवहारोचित चर्चा करना चाहिए। प्रवचन करीब 2 घंटे तक चले।
भगवान श्री ऋषभदेवजी के चित्र पर दीप प्रज्जवलन कर हुआ शुभारंभ
धर्मसभा की शुरूआत मंगलाचरण कर भावी आचार्य श्री ऋषभचन्द्र विजयजी मसा द्वारा की गई। पश्चात् श्री संघ व्यवस्थापक धर्मचन्द मेहता द्वारा गुरूवंदन की विधि करवाई गई। तत्पश्चात् भगवान श्री ऋषभदेव के चित्र पर दीप प्रज्जवलन कार्यक्रम के अतिथि डॉ. केके त्रिवेदी, निर्मल मेहता, नीरजसिंह राठौर, धर्मचन्द मेहता, सुभाष कोठारी, अभय धारीवाल, अशोक राठौर, संजय कांठी, मनोहर मोदी, भरत बाबेल आदि द्वारा किया गया। लता जैन ‘नाकोड़ा’ द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। अतिथियों का स्वागत समाज के वरिष्ठजनों ने किया।
पुलिस अधीक्षक ने किए मुनिराजजी के दर्शन-वंदन
श्री संघ के युवा रिंकू रूनवाल ने बताया कि धर्मसभा में विशेष रूप से पुलिस अधीक्षक महेशचन्द्र जैन भी शामिल हुए। जिनके द्वारा मुनिराज के दर्शन-वंदन किए गए। पश्चात् संजय कांठी द्वारा 7 मई को श्री मोहनखेड़ा तीर्थ पर होने वाले मुनिराजजी के आचार्य पदवी समारोह में सभी समाजजनों को शामिल होने हेतु आमंत्रण-पत्र का वाचन किया एवं आमंत्रण-पत्र उपस्थित सभी अतिथियों को प्रदान किए गए।
मनोहर मोदी का बहुमान किया गया
श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन ट्रस्ट मोहनखेड़ा की अध्यक्षीय मंत्रणा समिति में मनोहर मोदी को सदस्य बनाए जाने पर उनका श्री संघ द्वारा शाल ओढ़कार एवं श्रीफल भेंटकर बहुमान किया गया। साथ ही मंगलेश लोढ़ा रतलाम, राहुल सेठ एवं नरेन्द्र भंडारी राजगढ़ का श्री संघ एवं हेमेन्द्र सूरी मित्र मंडल के सदस्यों द्वारा सम्मान किया गया। इस अवसर पर मुनिराज ऋषभचन्द्र विजयजी मसा ने पिछले कई वर्षों से श्री संघ में अपनी सराहनीय सेवाएं दे रहे कांतिलाल बाबेल को आगामी महोत्सव में श्री मोहनखेड़ा तीर्थ पर ‘समाज रत्न’ की उपाधि से नवाजे जाने की घोषणा की। धर्मसभा में श्वेतांबर जैन श्री संघ के श्रावक-श्राविकाएं बड़ी संख्या में उपस्थित थी। संचालन श्री संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष यशवंत भंडारी ने किया एवं आभार अभय धारीवाल ने माना। पश्चात् साधर्मी वात्सल्य का आयोजन हुआ।
महावीर बाग पर हुआ मंगल प्रवेश
इससे पूर्व भावी आचार्य श्री ऋषभचन्द्र विजयजी मसा एवं पियूषचन्द्र विजयजी मसा का गुजरात की सीमा से होते हुए पिटोल में रविवार रात को मंगल प्रवेश हुआ। मुनिद्वय सोमवार सुबह यहां से विहार करते हुए 8 बजे महावीर बाग पहुंचे। ग्राम मिंडल में उनकी आगवानी श्री संघ के युवाओं द्वारा की गई। महावीर बाग पर नवकारसी का आयोजन किया गया।
शोभायात्रा निकाली गइ्र्र
पश्चात् यहां से शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें सबसे आगे बैंड-बाजों पर धार्मिक गीतों की प्रस्तुति दी जा रहीं थी। इसके पीछे ढोल-ताशे बज रहे थे। मुनिद्वय के साथ बड़ी संख्या में समाज के महिला-पुरूष चल रहे थे। शोभायात्रा में राजेन्द्र सूरीश्वरजी मसा के चित्र के सम्मुख जगह-जगह समाजजनों एवं गुरू भक्तों द्वारा गहूली की गई। युवाओं द्वारा गुरूदेवजी के जयकारे लगाए गए। रास्ते में मुनिद्वय के दर्शन-वंदन जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री कलावती भूरिया, आशीष भूरिया, पूर्व विधायक जेवियर मेड़ा, नाथुभाई मिस्त्री, केशव इंटरनेशनल के संचालक ओमजी शर्मा द्वारा किए गए।
इन मार्गों से निकला चल समारोह
यह शोभायात्रा शहर के दिलीप गेट, चेतन्य मार्ग, विजय स्तंभ तिराहा, जिला चिकित्सालय मार्ग, बस स्टेंड स्थित फव्वारा चौक, मेन बाजार, थांदला गेट, बाबेल चौराहा होते हुए श्री ऋषभदेव बावन जिनालय पहुंची। जहां मुनिद्वय ने बावन जिनालय में प्रवेश कर सर्वप्रथम भगवान श्री ऋषभेदवजी एवं गुरूदेव श्री राजेन्द्र सूरीश्वरजी मसा के दर्शन किए। मुनिद्वय का शाम 4 बजे बावन जिनालय से पारा की ओर विहार हुआ।
आज मनाई जाएगी आदिनाथजी की जयंती
श्री संघ के सह-सचिव अनिल रूनवाल ने बताया कि मंगलवार को श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में आदिनाथ जयंती महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। जिसके तहत प्रातः श्री आदिनाथ भगवान की रथ यात्रा निकाली जाएगी। बाद दोपहर में पंच कल्याणक पूजन का आयोजन होगा। श्री संघ के पूर्व व्यवस्थापक कांतिलाल बाबेल, आनंदीलाल संघवी, जयंतीलाल कोठारी, अभयकुमार धारीवाल, पन्नालाल सेठिया, दुलीचन्द्र वागरेचा, रामनारायण जैन आदि ने रथ यात्रा एवं पंच कल्याणक पूजन में श्री संघ के श्रावक-श्राविकाओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।

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