अमित शर्मा
झाबुआ। शिवगंगा समग्र गा्म विकास परिषद के बैनर तले जन भागीदारी से जल संवर्धन हलमा पत्रक एवं पोस्टर विमोचन के अवसर पर शिवगंगा द्वारा स्थानीय पैलेस गार्डन पर आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राजाराम कटारा ने बताया कि हलमा आदिवासी संस्कृति की पूरातन श्रेष्ठ परंपरा रही है । हलमा में गांव का कोइ व्यक्ति संकट मे फंस जाता है और वह अपनीपूरी ताकत लगाने के बाद भी संकट से नही निकल पाता हे तब वह हलमें का आव्हान करता है और तब गांव के लोक लोग मिल कर परमार्थ भाव से उसे संकट से उभार लेते हे । हर व्यक्ति के मन में यह बात कि आज धरती मां संकट में है इसलिये प्यासी धरती मां की प्यास बुझाने झाबुआ के भील परिवार गेती,तगारी,फावडा लेकर आगामी 4 एवं 5 मार्च को झाबुआ की हाथी पावां की पहाडियों पर जुटेगें। राजाराम कटारा ने बताया कि इस अभियान को लेकर 1 जनवरी से 15 जनवरी तक जिले के 440 चिन्हित किये गये गा्रमों के 40 हजार परिवारों में हलमें का आमन्त्रण दिया जावेगा। इसके लिये झाबुआ एवं आलीराजपुर के 11 विकासखंड बनाये जाकर इन 11 विकासखंडो में 125 विहार बनाये गये है जिसमें ये 440 गाम शामील है। श्री कटारा ने बताया कि शिवगंगा द्वारा पिछले कुछ बरसों से लगातार हलमें का आयोजन किया जारहा है जिसके सपरिणाम झाबुआ नगर सहित अन्य आसपास के गा्रमीण इलाकों में आरहा है । हलमें से प्रेरणा लेकर 200 से अधिक गांवों में जल संवर्धन एवं वन वर्धन का काम किया जा रहा है। अनेकों गांवों में हलमा एक जन अभियारन आन्दोलन का रूप् बनता जारहा है।
कटारा ने आगे बताया कि महा सपर्क अभियान को पूरा करने के लिये 29 दिसंबर एवं 30 दिसम्बर में 1100 कार्यकर्ताओं का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन कृषि उपज मंडी समिति परिसर में आयोजित होगा। महा संपर्क अभियान के लिये प्रत्येक गांव की टोली को साहित्य जिसमें पांच देवों के चित्र, प्रवेशिका का बेग दिया जावेगा । आज एवं कल 11 विकासखंडो से 11 कलर कोड झण्डे करीब 700 दुपहिया बाईका के साथ शिवगंगा के कार्यकर्ता भाग लेगें। इस प्रशिक्षण शिविर में मुख्य अतिथि सिद्धगिर मठ कोल्हापुर महाराश्ट्र के पीठाधिश्वर अदृश्य काड सिद्धेश्वर स्वामीजी उपस्थित रह कर मार्गदर्शन प्रदान करेगें। कटारा के अनुसारा आज हम सबकी मुख्य चिंता ग्लोबल वार्मिंग है। विश्वभर में विशेषज्ञ इसका समाधान खोज रहे है ऐसी स्थिति मे जनभागीदारी की मिसाल खोजी जा रही है। तब भील समाज की प्राचिन समय से प्रचलित हलमा परंपरा जनभागीदारी के माध्यम से र्प्यावरण को सरंक्षित एवं संविधर्त कर सकती हे और ग्लोबल वार्मिंग जैसी वैश्विक समस्या के समाधान में कारगर सिद्ध हो सकती है।कार्यक्रम का संचालन नीरजसिंह राठौर ने किया वही आभार प्रदर्षन महेश शाह ने किया। इसके पूर्व राजाराम कटारा, यशवंत भंडारी, नीरजसिंह राठौर, कमलेश पटेल, प्रवीण रूनवाल, श्रीमती भारती सोनी, पंकज जैन मोगरा, राजेश नागर, बहादूर भाई, उल्लास जैन, राजेश मेहता,,महेश शाह, आदि की उपस्थिति में पोस्टर्स का विमोचन किया गया ।


