बावन जिनालय के सभी शिखरों पर फहराई गई ध्वज पताका

JHABUA ABHITAK

अमित शर्मा  
झाबुआ। अति प्राचीन भव्य श्री ऋशभदेव बावन जिनालय में प्रतिवर्शानुसार इस वर्श भी सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा के षुभ अवसर पर जिनालयों के सभी षिखरांे पर लाभार्थी परिवारों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ ध्वजारोहण किया गया। पश्चात् जिनालय से श्री आदिनाथ भगवान की रजत रथ से सुसज्जित भव्य षोभायात्रा निकाली गई, जो षहर के मुख्य A से होते हुए पुनः जिनालय पहुंची। जहां उपधान तप के तपस्वी रचित एवं श्रीमती रचिता कटारिया के साथ सुभाश कोठारी का बहुमान किया गया। तत्पष्चात् उपस्थित श्री संघ के श्रावक-श्राविकाओं द्वारा श्री सिद्धाचल पट के समक्ष भाव वंदना एवं देववंदन किया गया। जिनालय में प्रातः भक्तामर स्त्रोत के साथ गुरू गुण इक्कीसा का पाठ सोहनलाल कोठारी के मार्गदर्षन में हुआ। श्रीमती लीलाबेन भंडारी द्वारा स्नात्र पूजन की गई। इंदौर से पधारे तपोनिश्ठ विधिकारक वेलजीभाई द्वारा सत्तर भेदी पूजन पढ़ाई गई। साथ ही ध्वजाओं की अश्टप्रकारी पूजन की विधि करवाई। ध्वज पूजन बाद जिनालय की तीन पदक्षिणा के साथ मंदिर के सभी षिखरों पर लाभार्थी परिवारांे द्वारा मंत्रोच्चार के साथ ध्वजारोहण किया गया। मुख्य षिखर पर ध्वजारोहण लाभार्थी दिलीपकुमार केसरीमल राठौर परिवार ने किया। मंदिर के कलष की पूजन सुजानमल कटारिया परिवार की श्रीमती आषा कटारिया द्वारा की गई। सत्तर भेदी पूजन का आयोजन जितेन्द्रकुमार, गौरवकुमार रूनवाल द्वारा किया गया।  ध्वजारोहण कार्यक्रम की व्यवस्था श्री संघ के उपाध्यक्ष यषवंत भंडारी, सह-सचिव अनिल रूनवाल, आदिनाथ राजेन्द्र संगीत मंडल के ओएल जैन, महेन्द्र मुथा, हेमेन्द्र संघवी, अषोक संघवी आदि द्वारा की गई।  सुबह 10 बजे बावन जिनालय से भव्य षोभायात्रा निकाली गई। जिसमें आगे बैंड-बाजों पर धार्मिक गीतों की प्रस्तुति दी जा रहीं थी। इसके पीछे समाज के पुरूश चल रहे थे। रजत रथ पर भगवान श्री आदिनाथ की प्रतिमा को विराजित करने का लाभ विजयकुमार रूनवाल परिवार द्वारा लिया गया। सारथी श्रीमती जीवनबेन पोरवाल बनी। चंवर ढुलाने का लाभ सेठिया परिवार द्वारा लिया गया। रथ को समाज के युवाजन खींचते हुए चल रहे थे। यात्रा के दौरान जगह-जगह समाजजनों द्वारा भगवान की प्रतिमा के समक्ष अक्षत एवं श्रीफल से गहूली की गई। सबसे पीछे समाज की महिलाएं बड़ी संख्या में आदिनाथजी के जयघोश लगाते हुए चल रहीं थी। यह षोभा यात्रा रूनवाल बाजाार, थांदला गेट, बाबेल चैराहा, आजाद चैक, राजवाड़ा चैक, लक्ष्मीबाई मार्ग से हुए पुनः मंदिर पहुंची। इस अवसर पर नव विवाहित दंपति रचित एवं रचिता कटारिया, जिन्होंने 45 दिनों तक उपधान तप की तपस्या श्री सिद्धाचल महातीर्थ में आचार्य श्री जयानंद सूरीष्वरजी मसा की पावन निश्रा में की, उनका बहुमान श्री संघ के पदाधिकारी एवं महिला सदस्यों द्वारा माला पहनाकर एवं षाल-श्रीफल भेंटकर किया गया। 

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