अमित शर्मा ( झाबुआ अभी तक)
दौलत गोलानी की रिपोर्ट
झाबुआ। अजाक्स संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एवं आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा द्वारा ब्राम्हण समाज की बेटियों को लेकर दिए गए विवाद बयान से संपूर्ण प्रदेश एवं देश में श्री परशुराम सेना एवं ब्राम्हण समाज में तीव्र आक्रोश है। प्रदेश स्तरीय आव्हान पर ही श्री परशुराम सेना एवं सर्व ब्राम्हण समाज ने मिलकर 27 नवंबर, गुरूवार दोपहर 3 बजे कलेक्टोरेट पहुंचकर मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन जिला प्रशासन से तहसीलदार सुनिलकुमार डावर को प्रेषित किया गया। जिसमें संतोष वर्मा के खिलाफ ब्राम्हण समाज विरोधी एवं अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करने पर उनके विरूद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर सामूहिक माफी मांगने की मांग रखी।
जानकारी देते हुए श्री परशुराम सेना जिलाध्यक्ष आशीष चतुर्वेदी ने बताया कि श्री परशुराम सेना एवं सर्व ब्राम्हण समाज के वरिष्ठ तथा युवाजन गुरूवार दोपहर कलेक्टोरेट में एकत्रित हुए और प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन तहसीलदार सुनिलकुमार डावर को सौंपा। ज्ञापन सौंपते समय बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि अजाक्स प्रदेश अध्यक्ष एवं आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा द्वारा सार्वजनिक रूप से ब्राम्हण समाज की सामाजिक मर्यादा, संस्कृति एवं परंपराओं को लक्षित करते हुए अत्यंत आपत्तिजनक, अमर्यादित एवं समाज को भड़काने वाली टिप्पणी की है। इस टिप्पणी से संपूर्ण ब्राम्हण समाज की भावनाएं आहत हुई है तथा समाज में व्यापक रोष व्याप्त है। ब्राम्हण समाज सदैव शांति, सद्भाव, संस्कारवान एवं राष्ट्रहित में योगदान देने के लिए पहचाना जाता है। किसी भी समाज के प्रति इस प्रकार की टिप्पणी ना केवल सामाजिक सौंहार्दता को बिगाड़ती है, अपितु समाजों को आपस में संघर्ष की ओर ले जाती है।
4 सूत्रीय मांग रखी
इस हेतु श्री परशुराम सेना एवं सर्व ब्राम्हण समाज की ओर से ज्ञापन में 4 सूत्रीय मांग रखी गई। जिसमें संतोष वर्मा के खिलाफ अविलंब एफआईआर दर्ज की जाने, जांच हेतु एक विशेष समिति गठित की जाए, भविष्य में सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले व्यक्तियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, संतोष वर्मा द्वारा ब्राम्हण समाज से सार्वजनिक रूप से लिखित या मौखिक क्षमा याचना की जाए, अन्यथा परशुराम सेना एवं सर्व ब्रम्हाण समाज संपूर्ण प्रदेश में चरणबद्ध लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने हेतु बाध्य होगा। ज्ञापन की प्रतिलिपि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम भी प्रेषित की गई।

