अमित शर्मा
झाबुआ। केन्द्र सरकार ने नीति आयोग बनाकर अब विकास योजनाओं के निर्माण में आधारभूत परिवर्तन किया है।अब जमीनी आंकलन के बाद ही जिले की योजना को मंजूरी दी जाएगी। गांव की आवश्यकता को देखते हुवे योजना को अंतिम रूप दिया जायेगा। इसी लिये योजना आयोंग जिलो में बैठक आयोजित कर जिला कलेक्टरो से सुझाव आमंत्रित कर रहा हैे। उक्त बात राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष चेतन्य कश्यप ने बुधवार को झाबुआ जिला मुख्यालय पर कलेक्टर कार्यालय सभाकक्ष में संपन्न राज्य योजना आयोग की बैठक में कही। बैठक में चार जिलो झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बडवानी के त्रिवर्षीय विकेन्द्रीकृत जिला योजना के प्रस्तावों पर योजनाओं व उसके बजट पर विभागवार चर्चा की गई। बैठक में राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष कश्यप ने कहा कि लागू पंचवर्षीय योजना मार्च 2017 में समाप्त हो रही है। इसके बाद पंचवर्षीय योजना लागू नहीं होगी। अप्रैल 2017 से नवीन विकेन्द्रीकृत योजना लागू की जाएगी। बैठक में उपाध्यक्ष कश्यप ने कहा कि योजनाओं के लिए शासन स्तर से प्राप्त बजट का समुचित उपयोग करे। जिले में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिन्हांकित करे। रोड सैफ्टी संबंधी प्लान तैयार करे। बैठक में राज्य योजना आयोग के प्रमुख सलाहकार राजेन्द्र मिश्रा, पी.सी.बारस्कर, डाॅ. बीएल शर्मा, कलेक्टर झाबुआ आशीष सक्सेना, कलेक्टर अलीराजपुर गणेश शंकर मिश्रा, कलेक्टर धार श्रीमन शुक्ल एवं कलेक्टर बड़वानी तेजस्वनी एस नायक, सहित चारो जिलों के पुलिस अधीक्षक, सीईओ जिला पंचायत सहित चारो जिलों के विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
अब 28 योजनाओ में ही मिलेगा बजट----
राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष चेतन्य कश्यप ने कहा कि केन्द्र सरकार ने योजना आयोग को खत्म कर दिया है क्योकि 70 वर्षो में इस देश को कुछ हासिल नहीं हुआ है। इसलिए सरकार ने नीति आयोग का गठन किया है। पहले राज्य सरकारों को 167 योजनाओं के मद में बजट मिलता था अब सरकार ने उसे घटाकर 28 योजनाएॅ कर दिया है। अब इन्ही योजनाओं के मद में बजट जारी किया जाएगा।
कन्सलटेन्सी सर्विस के लिए हर जिले को मिलेगे 1 करोड----
जिले में जिले की आवश्यकता को देखते हुए जिला कलेक्टर किसी भी प्रोजेक्ट को चलाने के लिए एवं अच्छे विकास के लिए प्रोजेक्ट कन्सलटेन्सी सर्विस निजी क्षेत्र से हायर करने के लिये स्वतंत्र होगे। इसके लिए हर जिले को 1 करोड रूपये बजट आवंटित किया जाएगा एवं प्रोजेक्ट के लिये यदि ओैर अधिक बजट की आवश्यकता होगी तो कार्य के महत्व को देखते हुवे और भी बजट दिया जायेगा। उपाध्यक्ष चेतन्य कश्यप ने बैठक में कहा कि 5 वर्षीय योजना के बजाय अब 15 वर्षीय कार्ययोजना पर काम करेगे। इसके बाद उसे दो टुकडो में 7-7 साल की योजना बनायेगे। आगामी तीन सालों के लिए हर एक जिले की आर्थिक योजना तैयार करके लागू किया जाएगा। जिले की योजना के सही क्रियान्वयन के लिए कंसलटेन्ट हायर करेगे, वह सर्वे करेगे फिर लक्ष्यों का निर्धारण होगा, सभी योजनाओं का एक्शन प्लान तैयार कर काम किया जाएगा। बैठक में राज्य योजना आयोग के सलाहकार श्री राजेन्द्र मिश्रा ने विकेन्द्रीकृत जिला योजना के संबंध में राज्य योजना आयोग की तरफ से जारी दिशा-निर्देशो से अवगत कराया। बैठक में कलेक्टर झाबुआ श्री आशीष सक्सेना ने सभी का स्वागत किया एवं आभार प्रदर्शन किया।
इतने की योजनाए प्रस्तावित ---
बैठक में झाबुआ जिले के लिए वर्ष 2017-18 के लिए 158689.14 लाख, वर्ष 2018-19 के लिए 155352.01 लाख, एवं 2019-2020 के लिए 171940.31 लाख की योजना प्रस्तावित की गई। बैठक में बड़वानी जिले के लिए वर्ष 2017-18 के लिए 129264.05 लाख, वर्ष 2018-19 के लिये 131623.62 लाख, एवं वर्ष 2019-20 के लिए 162282.92 लाख की योजना प्रस्तावित की गई। धार जिले के लिए वर्ष 2017-2018 के लिए 94575.24 लाख, 2018-19 के लिये 125394.43 लाख एवं 2019-20 के लिये 137312.19 लाख की योजना प्रस्तावित की गई। अलीराजपुर जिले के लिए वर्ष 2017-18 के लिए 92200.36 लाख, 2018-19 के लिये 108884.93 लाख एवं 2019-20 के लिये 116128.96 लाख की योजना प्रस्तावित की गई।


