विधिक साक्षरता षिविर संपन्न ,सकारात्मक विचारो का समावेष करे अपने अंदर - भलावी

JHABUA ABHITAK

अमित शर्मा 
झाबुआ। मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देष तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीष और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री एसके कुलकर्णी के मार्गदर्षन में निवार को दोपहर 12 बजे जिला जेल में विधिक साक्षरता षिविर का आयोजन किया गया। षिविर में अतिथि के रूप में न्यायाधीष श्री राधाकिषन मालवीय एवं श्री संजयकुमार भलावी तथा जिला साक्षरता दल के वरिश्ठ सदस्य यषवंत भंडारी और श्रीमती अर्चना राठौर उपस्थित थी।  शिविर के प्रारंभ में बंदियों को जानकारी देते हुए साक्षरता दल के सदस्य श्री भंडारी ने बताया कि यह षिविर यहां आज इसलिए आयोजित किया गया है कि आप इसके माध्यम से निःषुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सके, अपने अधिकारों को जान सके, अपनी समस्याओं माननीय न्यायाधीष के समक्ष रख सके। आपने बताया कि कोई जन्मजात अपराधी प्रवृत्ति का नहीं होता है। हम आवेष में आकर बड़े-बडे अपराध कर बैठते है और जिसकी सजा में यहां रहकर भुगतना पड़ती है, लेकिन यहां भी हम प्रसन्नचित होकर रहे और सजा के बाद जेल से निकलने के बाद अगली बार संकल्प ले कि हम ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे की हमे दोबारा यहां आना पड़े। हम अपनी सोच हमेषा सकारात्मक रखे। 

न्यायाधीष मालवीय ने बताया कि हम अक्सर क्रोध में आकर अपराध कर बैठते है। क्रोध में समय यह ज्ञान नहीं होता है कि हम क्या कर रहे है, इसलिए क्रोध को नियंत्रित करने के प्रयास करे, जब क्रोध आए तो लंबी सांस ले और क्रोध के कारण भूलाने का प्रयास करे, जिससे हम कुछ ही देर में पुनः सामान्य हो जाएंगे। उन्होंने उपस्थित बंदियों से उनके नियुक्त अधिवक्ताओं के बारे में जानकारी पूछी तथा बताया कि जिसके अधिवक्ता नहीं है, वह ऐसी स्थिति में विधिक प्राधिकरण के माध्यम से अधिवक्ता की निःषुल्क सेवाएं प्राप्त कर सकते है। इस दौरान कई बंदियो ंने अपनी समस्या श्री मालवीय को बताई कि उन्हें झूठे प्रकरणों में फंसाया दिया गया है तथा निजी रूप से अधिवक्ता करने पर उनके द्वारा प्रकरण में कोई रूझान नहीं लिया जा रहा है। ऐसे बंदियांे के नाम नोट किए गए एवं उनकी समस्या का निराकरण के संबंध में न्यायाधीषद्वय द्वारा आवष्यक परामर्ष दिया गया। तत्पश्चात् न्यायाधीष श्री भलावी ने बंदियों से आव्हान करते हुए कहा कि वे अपने विचारों में परिवर्तन लाए, सकारात्मक विचारांे का समावेष करे। अपने अंदर की लालच और दुश्कर्म की भावना की समाप्त करे। उन्होंने बताया कि कई बार हम छोटे-छोटे अपराधो में भी सजा मिलने से जेल में आ जाते है। आपने बदियों को उनके मौलिक कर्तव्यों, मनो सामाजिक मुदृदों, साईबर अपराध, दैनिक जीवन में उपयोग सामान्य विधियां, अर्थात अपराध से बचने के लिए सामान्य बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी।

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