अमित शर्मा
झाबुआ।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा स्थानीय आफिसर्स कालोनी स्थित महिला निराश्रित एवं बाल आश्रम में आयोजित जागरूकता षिविर आयोजित किया | षिविर में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि न्यायाधीष श्री आरके मालवीय ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि आपको तीन बातों का जीवन में सदैव ध्यान रखना चाहिए। वह है अपना आत्मविष्वास सदैव बनाए रखना, दृढ़ इच्छा षक्ति एवं आत्म निर्भर बनने के सदैव प्रयास करना चाहिए, अर्थात अपने स्वयं के कार्य स्वयं को ही करना चाहिए। आपने स्वामी विवेकानंदजी के जीवन से प्रेरणा लेने का आव्हान करते हुए विद्यार्थियों से कहा कि स्वामी विवेकानंदजी अपने सभी कार्य स्वयं ही करते थे, यहां तक की वे अपने पैरों के जूते भी अपने हाथ से ही साफ करते थे। श्री मालवीय ने छोटी सी कविता के माध्यम से कहा कि रास्ता चलना नेक, चाहे देर हो, रखना सबसे स्नेह, आपस में नहीं वैर हो।
प्रारंभ में सभी अतिथियों द्वारा मां सरस्वतीजी के चित्र पर पुश्प अर्पित कर दीप प्रज्जवलित किया गया। स्वागत भाशण संस्था की अध्यक्षता श्रीमती वर्शा चैरे ने दिया। अपने उद्बोधन में श्री भंडारी ने आगे कहा कि षिक्षा के साथ प्रत्येक व्यक्ति में संस्कार होना जरूरी है और संस्कारित व्यक्ति सदैव नियम एवं कानून का पालन करता है। हमारे देष की कानून व्यवस्था हमारे संविधान के अनुसार चलती है, इसलिए प्रत्येक भारतीय नागरिक को भारतीय संविधान का ज्ञान होना आवष्यक है।
विधि का एक अर्थ होता है, विधाता। दूसरा अर्थ होता है कानून एवं तीसरा अर्थ होता है कोई कार्य करने का तरीका। इन तीनों में बहुत ही सामंजस्य एवं एकरूपता है। विधि अर्थात प्रकृति ने अपने नियम बनाए है, कानून ने अपने नियम बनाए है और इन दोनो का विधिपूर्वक पालन करने वाला व्यक्ति अपना जीवन श्रेश्ठ बनाता है। उक्त उद्बोधन प्रमुख वक्ता यषवंत भंडारी ने व्यक्त किए।
इस अवसर पर न्यायाधीष श्री एसके भलावी ने बच्चों को स्वच्छता, जल एवं पर्यावरण की रक्षा के साथ संस्कार रूपी गुणों की अनेकों बाते समझाई। कार्यक्रम का संचालन साक्षरता दल के वरिश्ठ सदस्य जयेन्द्र बैरागी ने किया। इस अवसर पर सस्था के सभी छात्र-छात्राएं एवं षिक्षिकाएं उपस्थित थी।


